Computer Programming in hindi - कंप्यूटर प्रोग्रामिंग

 

Computer Programming in hindi - कंप्यूटर प्रोग्रामिंग

Computer Programming क्या है। -

Computer Programming समझने से पहले हमें ये समझना होता है कि Computer क्या काम करता है और कैसे काम करता है। कम्प्यूटर का मुख्य काम Data का Management करना होता है। हमारे आस-पास जो भी चीजें हमें दिखाई देती हैं ये सभी एक Object Oriented Programming Language for Objects |


हर Objects के कुछ Attributes होते हैं, जिनसे किसी Particular Object की पहचान होती है। इस Attribute में Numerical या Non Numerical किसी ना किसी प्रकार का मान प्रदान किया जा सकता है। ये मान ही Computer का वह Data होता है, जिसे Computer Manage करता


यदि बिल्कुल ही सरल शब्दों में कहें तो कोई मान या मानों का समूह Computer के लिए Data होता है। ये मान दो तरह के हो सकते हैं: Numerical या Non-Numerical, Computer में हम इन्हीं Data को Store करते हैं, Process करते हैं और किसी ना किसी प्रकार की Information Generate करते हैं।


Computer केवल Electrical Signals या मशीनी भाषा को समझता है ये मशीनी भाषा बायनरी रूप में होती है जहां किसी Signal के होने को 1 म ना होने को 0 से प्रदर्शित किया जाता है। यदि हम हमारी किसी बात को Binary Format में Computer में Feed कर सके, तो Computer हमारी बात को समझ सकता है।


Computer भाषा वह भाषा होती है, जिसे Computer समझ सकता है। हर Computer भाषा का एक Software होता है, जिसे Compiler या Interpreter कहते हैं। ये Software हमारी बात को Computer के समझने योग्य मशीनी भाषा या Binary Format में Convert करता है।


Computer को कोई बात समझाने के लिए उसे एक निश्चित क्रम में सूचनाएं देनी होती है, जिन्हें | Instructions कहा जाता है। Computer इन दी गई Instructions के अनुसार काम करता है और हमारी इच्छानुसार हमें परिणाम प्रदान करता है। Instructions के इस समूह का ही Program कहा जाता है


Computer में हर Electrical Signal या उसके समूह को Store करके रखने की सुविधा होती है। इन Electrical Signals के समूह को File कहते हैं। Computer में जो भी कुछ होता है वह File के रूप में होता है। Computer में दो तरह की File होती है। पहली वह File होती है जिसमें हम हमारे महत्वपूर्ण Data Store करके रखते हैं। इसे Data File कहा जाता है।


दूसरी File यह File होती है, जिसमें Computer के लिये वे Instructions होती है, जो Computer को बताती है कि उसे किसी Data पर किस प्रकार से Processing करके Result Generate करना है। इस दूसरी प्रकार File को Program File कहा जाता है।


हम विभिन्न प्रकार की Computer Languages में Program Files ही Create करते हैं। जब बहुत सारी Program Files मिल कर किसी समस्या का समाधान प्राप्त करवाती हैं, तो उन Program Files के समूह को Software कहा जाता है।



Computer Software मुख्यतया दो प्रकार के होते हैं

(1) System Software - system software in hindi

ये Software उन प्रोग्रामों का एक समूह होता है जो कम्प्यूटर की Performance को Control करता है। यानी Computer पर किस तरह से एक प्रोग्राम रन होगा और किस से प्रोग्राम Output देगा। किस तरह Hard Disk पर Files Save होंगी, किस तरह पुनः प्राप्त होगी, आदि। Windows, Unix Linux, आदि System Software के उदाहरण हैं।


(2) Application Software - application software in hindi -

ये Software प्रोग्रामरों द्वारा लिखे जाते हैं ये Software किसी खास प्रकार की समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिये होते हैं। जैसे Tally. MS Office आदि Application Software के उदाहरण है।



Hardware Programming -

इस Programming के अन्तर्गत Computer के Hardware यानी Computer के Motherboard पर लगाए गए विभिन्न प्रकार के Chips Computer से जुड़े हुए अन्य विभिन्न प्रकार के Peripherals जैसे कि Keyboard, Mouse, Speaker, Monitor, Hard Disk, Floppy Disk, CD Drive आदि को Check करने व Control करने के लिए हर Mother Board पर एक BIOS Chip लगाई जाती है। इस BIOS Chip का मुख्य काम Computer को ON करते ही विभिन्न प्रकार के Devices को Check करना होता है।


यदि Computer के साथ जुडी हुई कोई Device ढंग से काम नहीं कर रही है, तो BIOS User को विभिन्न प्रकार की Error Messages देता है। BIOS Chip के अन्दर ही प्रोग्राम को लिखने का काम BIOS बनाने वाली Company करती है। इसे Hard Core Programming या Firmware कहा जाता है। Hardware Programming में Chip को बनाते समय ही उसमें Programming कर दी जाती है। किसी भी Computer के Motherboard पर लगी BIOS Chip यदि खराब हो जाए तो Computer किसी भी हालत में काम करने लायक अवस्था में नहीं आ सकता यानी Computer कभी Boot नहीं होता।



Software Programming -

Computer को काम करने लायक अवस्था में लाने के लिए जिस Software को बनाया जाता है. उसे Operating System Software कहा जाता है। BIOS Chip का काम पूरा होने के बाद Computer का पूरा Control Operating System Software के पास आ जाता है। Computer के पास BIOS से Controlling जाने के बाद सबसे पहले Memory में Load होने वाला Software Operating System Software ही होता है। इसे Master Software या Operating System Software भी कहते हैं।


आज विभिन्न प्रकार के Operating System Software बन चुके है जैसे DOS, Windows OS/2 WRAP, Unix Linux आदि। इन सभी Software का मुख्य काम Computer को Boot करके User के काम करने योग्य अवस्था में लाना होता है।


दूसरी Programming यह Programming होती है, जिससे Computer हमारी बात को समझता है और हमारी इच्छानुसार काम करके हमें परिणाम प्रदान करता है। इन्हें Application Software कहा जाता है। हम किसी भी Operating System के लिए किसी भी भाषा में जब कोई Program लिखत है, तो वास्तव में हम Application Software ही लिख रहे होते हैं। Application Software का मुख्य काम किसी विशेष समस्या का समाधान प्रदान करना होता है।


MS-Office, Corel-Draw. PageMaker, PhotoShop Application Software के उदाहरण है, जो हमें किसी विशेष समस्या का समाधान प्रदान करते हैं। जैसे यदि हमें Photo Editing से सम्बंधित कोई काम करना हो तो हम Photo Shop जैसे किसी Application Software को उपयोग में लेते है।

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