Oracle Database Structure In DBMS In Hindi

 

Oracle Database Structure In DBMS In Hindi

ओरेकल डेटाबेस स्ट्रक्चर इन dbms हिंदी -

ऑरकल डेटाबेस डेटा का एक समूह होता है तथा इस डेटा को रिलेशनल मॉडल से मैच करते हुए ही डेटा को संग्रह या एक्सेस किया जाता है। यह डेटा हमेशा Tables के रूप में संग्रह होता है। ये टेबल्स रिलेशनल्स होते हैं व इन्हें कॉलम्स के द्वारा परिभाषित किया जाता है।


Oracle Database Structure In DBMS In Hindi


ऑरकल डेटाबेस का अपना संपूर्ण डेटा, फाइल्स में संग्रह होता है। आंतरिक रूप में डेटाबेस स्ट्रक्चर होता है, जो डेटा व फाइल्स में लॉजिकल मेपिंग करता है, जिससे अलग-अलग डेटा को अलग-अलग संग्रह कर सकें।

टेबलस्पेसेस (Tablespaces) - 

टेबलस्पेस डेटाबेस का लॉजिकल भाग होता है। प्रत्येक डेटाबेस में कम-से-कम एक टेबलस्पेस होता है जिसे SYSTEM टेबलस्पेस कहते हैं। दूसरे टेबल स्पेसेस का उपयोग यूजर के समूह या उपयोगिता की दृष्टि से जिससे कि ऑपरेशन्स व नियंत्रण में अधिक सुविधा हो इस हेतु किया जाता है।

ऐसे टेबलस्पेस के उदाहरण हैं - USERS जो साधारण कार्यों के लिए RBS, रॉलबैक (Rollback) सिगमेंट्स के लिए। कोई भी टेबलस्पेस में एक या अधिक डेटाफाइल्स हो सकती है। प्रत्येक डेटा फाइल्स सिर्फ एक ही टेबलस्पेस में हो सकती है। डाटाबेस आब्जेक्ट्स को बहुत सी टेबलस्पेस में रखने के लिए विभाजित किया जाता है, जिससे कि उन्हें भौतिक रूप में भी अलग-अलग डेटा फाइलों में संग्रह करके रखा जा सके और जो अलग-अलग डिस्क पर रखी जा सके 


Types of Oracle Database Structure in dbms (डाटाबेस स्ट्रक्चर) -

ऑरकल डेटाबेस स्ट्रक्चर को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है

(1) ऐसे element (अवयव) जो डेटाबेस से आंतरिक संबंध रखते हैं।

(2) ऐसे element (अवयव) जो मेमोरी एरिया से आंतरिक संबंध रखते हैं। 

(3) ऐसे element (अवयव) जो डेटाबेस से बाह्य संबंध रखते हैं।

1. ऐसे अवयव जो डेटाबेस से आंतरिक संबंध रखते हैं-

(1) टेबल्स (Tables) 

(2) कॉलम्स) (Columns), 

(3) डेटाटाईप (Datatype) 

(4) कन्सट्रेन्ट्स (Constraints), 

(5) यूजर्स (Users). 

(6) स्किमास (Schemas), 

(7) इन्डेक्स (Index), 

(8) कलस्टर (Clusers), 

(9) हेश क्लस्टर्स (Hesh) clusters), 

(10) व्यूज् ( Views) 

(11) सिक्वेन्सेस (Sequences), 

(12) प्रोसिजरस (Procedures). 

(13) फंक्शन्स (Functions), 

(14) पैकेज (Packages), 

(15) ट्रिगर्स (Triggers), 

(16) सिनोनिम (Synonyms), 

(17) प्रिविलेज (Privileges), 

(18) रोल्स (Roles), 

(19) डेटाबेस लिंक्स (Database links), 

(20) सिगमेंट्स (Segments), 

(21) रालबेक सिगमेंट्स (Rollback Segments) 


(1) टेबल्स (Tables)- 

टेबल एक डेटाबेस ऑब्जेक्ट्स होता है जिसमें हमें डेटा को Store या संग्रह करते हैं, अर्थात टेबल डेटा संग्रह का माध्यम व तरीका है जो Row व Columns से मिलकर बनता है। 


(2) कॉलम्स (Columns) - 

टेबल के द्वारा हम जिस एंटीटी को प्रदर्शित कर रहे हैं उसके एट्रिब्यूट्स (गुण) को दर्शाने के लिए कॉलम्स का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक कॉलम का एक विशेष नाम व विशेष गुणधर्म होता है। 


(3) डेटाटाइप (Data type ) - 

किसी भी कॉलम्स के दो गुण दो तत्वों को मिलाकर बनते हैं। वे हैं डेटाटाइप व उनकी लंबाई |


(4) कन्ट्रेन्ट्स (Contraints) - 

कन्ट्रेन्ट्स हमारे डेटा पर कुछ ऐसी कंडीशन होती है जो कि स्वतः ही क्रियान्वित हो जाती है। जब कभी भी कोई डेटा, डेटाबेस में ट्रांसफर हो रहा होता है। 


(5) यूजर्स (Users) - 

यूजर का एकांउट डेटाबेस के अंदर कोई भौतिक स्ट्रक्चर नहीं होता है परन्तु डेटाबेस में ऑब्जेक्ट्स के बीच में यह बहुत महत्वपूर्ण संबंध बनाये रखता है। यूजर्स के अपने स्वयं के डेटाबेस ऑब्जेक्ट्स होते हैं जैसे यूजर्स SYS के पास डेटा डिक्शनरी टेबल होता है। 


(6) स्किमास ( Schemas)-

उन ऑब्जेक्ट्स का समूह जो कि किसी यूजर्स एकांउट में होते हैं यूजर का स्किमास कहलाते हैं। 


( 7 ) इन्डेक्सेस (Indexes ) - 

Index एक ऐसा डेटाबेस ऑब्जेक्ट है जिसका उपयोग टेबल में किसी रॉ को तीव्रगति से ढूँढ़ने में किया जाता है। इन्डेक्स दो प्रकार के होते हैं क्लस्टर इन्डेक्स तथा टेबल इंडेक्स। 

(8) क्लस्टर्स (Clusters)-

ऐसे टेबल्स जिनको बार-बार आपस में एक्ससेस करते हैं उनको भौतिक रूप से एक साथ रखा जाता है। इन सब टेबल्स को एक साथ संग्रह करने के लिए क्लस्टर्स बनाया जाता है। अतः समस्त डेटा जो कि अलग-अलग टेबल्स में होता है को एक साथ रखकर इनपुट/आउटपुट ऑपरेशन्स को कम करके उसकी कार्यशीलता को बढ़ाते हैं। अतः ऐसे समस्त टेबल्स के समस्त कॉलम जो कि आपस में संबंध रखते हैं, 'क्लस्टर की' कहलाते हैं। क्लस्टर की जो क्लस्टर इंडेक्स की मदद से हम इन्डेक्सड करते हैं व बहुत से टेबल्स के लिए इस 'की' की वेल्यू एक ही बार संग्रह होती है। 


(9) हेश क्लस्टर (hash clusters) -

आरेकल दूसरे तरह की क्लस्टर देता है हेश क्लस्टर जो कि हेश फंक्शन क्लस्टर की key (की) Rows (रोज) पर उपयोग करके किसी Rows (रोज) की  भौतिक स्थिति का पता लगाता है। इससे क्यूरी प्रोसेसिंग में बहुत अधिक फायदा मिलता है।


(10) व्यू (View) - 

व्यू एक लॉजिकल टेबल होता है। यह एक ऐसे टेबल के रूप में प्रदर्शित होता है जिसमें की एक या अधिक टेबल्स के कॉलम्स का समूह हो तथा टेबल की तरह उसमें समस्त प्रोसेसिंग की जा सकती है।


(11) सिक्वेन्स (Sequences)- 

सिक्वेन्स एक ऐसा ऑब्जेक्ट होता है जिसका उपयोग प्रोग्रामिग कार्यों (जैसा-कोड जनरेशन) को अधिक सरल बनाने के लिए किया जाता है इसकी नंबरों की क्रमबद्ध सूची प्राप्त कर सकते हैं। इसकी परिभाषा डाटा डिक्शनरी में होती है।"


(12) प्रोसिजर (Procedures)- 

प्रोसिजर एक ब्लॉक होता है जिसमें बहुत से कथन होते हैं, यह भी एक डेटाबेस ऑब्जेक्ट होता है, अतः इसकी परिभाषा भी डेटा डिक्शनरी में परिभाषित होती है तथा इसे किसी अन्य एप्लीकेशन प्रोसिजर के द्वारा कॉल किया जाता है। इसमें हम ऐसे लॉजिक रखते हैं जिसकी हमें बार-बार जरूरत होती है। इसके समस्त कथन एक यूनिट के रूप में ही क्रियान्वित होता है तथा साथ ही प्रोसिजर कोई भी रिटर्न (देना) Value नहीं देती है। 


(13) फंक्शन (Functions ) – 

फंक्शन भी डेटाबेस ऑब्जेक्ट होते हैं व पूरी तरह से प्रोसिजर के समान ही कथनों का ब्लॉक होते हैं। बस अंतर यह होता है कि कॉलिंग प्रोग्राम जो call किया है कोई वेल्यू रिटर्न करते हैं। 


(14) पैकेज (Packages)-

पैकेज का उपयोग प्रोसिजर्स व फंक्शन का एक लॉजिकल समूह बनाने के लिए किया इसे भी डेटा डिक्शनरी में परिभाषित किया गया है। प्रोसिजर्स व फंक्शन्स को सामूहिक रूप से नियंत्रित करने के लिए आवश्यक एडमिनिस्ट्रेटिव कार्यों के लिए पैकेज बहुत अधिक उपयोगी है। 


(15) ट्रिगर (Triggers) - 

ये ऐसे प्रोसिजर हैं जो विशेष टेबल पर कोई विशेष डेटाबेस इवेन्ट (घटना) होने पर स्वतः ही क्रियान्वित हो जाती है इनकी मदद से हम रिफरेन्शीयल इंटिग्रिटी सुरक्षा ऑडिटिंग ऑप्शन को और अधिक मजबूत बना सकते हैं। 


(16) सिनोनिम्स (Synonyms) - 

किसी डिस्ट्रीब्यूटेड ऑरकल डेटाबेस सिस्टम में किसी डेटाबेस को पूर्णतः पहचानने के लिए होस्ट (Host) मशीन का नाम, सर्वर का नाम, ऑब्जेक्ट के यूजर का नाम व स्वयं ऑब्जेक्ट का नाम सभी जरूरी होते हैं। ऑब्जेक्ट कहाँ पर है इस आधार पर इन चार अवयवों की आवश्यकता तय की जाती है। सिनोनिम्स किसी ऑब्जेक्ट का पूर्ण पाय (रास्ता) बताते हैं और किसी भी ऑब्जेक्ट को ढूँढ़ने के लिए उसका सिनोनिम्स क्षेत्र पर्याप्त होता है। पब्लिक सिनोनिम्स का उपयोग उस डेटाबेस के सभी यूजर कर सकते हैं जबकि प्रायवेट सिनोनिम्स का उपयोग सिर्फ वही यूजर कर सकते हैं जहाँ पर यह बना है।


(17) प्रिविलेजर्स (Privilegers) - 

प्रिविलेजर्स ऐसे अधिकार होते हैं जो सखर (Server ) पर उपलब्ध रिसार्सस के उपयोग की अनुमति प्रदान करते हैं। 


(18) रोल्स् (Roles) – 

प्रिविलेजर्स का समूह ही रोल कहलाता है।


(19) डेटाबेस लिंक्स (Database links) - 

जिन ऑरिकल डेटाबेस में डेटाबेस लिंक की सुविधाएँ होती हैं वे ऐसे डेटा का उपयोग भी कर सकते हैं जोकि लोकल डेटाबेस से बाहर है, परन्तु इस तरह डेटा के उपयोग के लिए उसका (फुली क्वालीफाइड ऑब्जेक्ट नेम) देना जरूरी है में होम्स मशीन का नाम, सर्वर का नाम, ऑब्जेक्ट के ऑनर का नाम व स्वयं ऑब्जेक्ट का नाम होता है। अब यदि टेबल किसी रिमोट (दूर पर) डेटाबेस पर उपलब्ध हो तब उसका एक्सेस पाथ भी बताना पड़ता है तब हम डेटाबेस लिक बनाते हैं डेटाबेस लिंक या पब्लिक या प्राइवेट होती है।


(20) सिगमेंट्स (Segments) - 

सिगमेंट किसी लॉजिकल डेटाबेस ऑब्जेक्ट का फिजिकल रूप होता है जो कि डेटा संग्रह करता है जैसे Index segment वह data संग्रह करता है जो Index से संबंधित होता है। सिगमेंट के प्रभावी मैनेजमेंट के लिए DBA को यह मालूम होना चाहिए कि कौन-सी एप्लीकेशन कौन-सा ऑब्जेक्ट उपयोग करेगी, उन ऑब्जेक्ट्स में डेटा कैसे जाएगा व उनसे पुनः उसे प्राप्त कैसे किया जाएगा।


(21) रॉलबैक सिगमेण्ट्स (Rollback Segments ) - 

किसी डेटाबेस के बहुत से Users को एक साथ रीड ऑपरेशन करने पर स्थायित्व बना रहे व साथ ही सभी ट्रांजेक्शन को रोल बैक किया जा सके, इन सबके लिए ऑरिकल डेटा की बिफोर इमेज बना लेता है। इसके लिए ऑरकल डेटाबेस के अंदर रौलबैक सिगमेंट बनता है।


2. ऐसे अवयव जो मेमोरी से आंतरिक संबंध रखते हैं-

ऑरकल डेटाबेस दो अलग-अलग तरह के मेमोरी Structure उपयोग करता है। पहला ग्लोबल एरिया व दूसरा प्रोसेस एरिया, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस डेटाबेस सरवर ऑप्शन का उपयोग किया है। मेमोरी आप्शन्स का उपयोग बहुत अलग-अलग होता है। यहाँ पर कुछ ग्लोबल एरिया के अवयव बताये गये हैं

(A) ग्लोबल एरिया - 

(1) System Global Area (SGA) (सिस्टम ग्लोबल एरिया), (2) Data Block Buffers (डेटा ब्लॉक बफर), 

(3) Directory cache (डायरेक्टरी केश), 

(4) Shared SQL Pool (शेयर्ड SQL) 

(5) Context Area (कान्टेक्स्ट एरिया), 

(6) Program Global Area (प्रोग्राम ग्लोबल एरिया)। 


(1) System Global Area (SGA) (सिस्टम ग्लोबल एरिया) - 

यह अलग-अलग यूजर्स के बीच" सूचनाओं के स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करता है। साथ ही यह बार-बार काम आने वाली सूचनाओं का स्ट्रक्चर भी रखता है।


(2) Data Block Buffers (डेटा ब्लॉक बफर)- 

डेटा ब्लॉक बफर SGA की कैश मेमोरी होती है जो स्ट्रक्चर भी रखता है। डेटाबेस के डेटा सिगमेंट्स (जैसे-टेबल, इन्डेक्सेस व क्लस्टर्स) से भी डेटा ब्लॉक पढ़ा जाता है। उसे संग्रह करके रखता है। डेटा ब्लॉक बफर का आकार INIT.ORA फाइल में DBF BLOCK BUFFERS के पैरामीटर के द्वारा परिवर्तित किया जाता है।


(3) Directory (Dictionary Cache) [ (डिक्शनरी केश) ]-

डेटाबेस ऑब्जेक्ट्स से संबंधित समस्त जानकारी इस डेटा डिक्शनरी टेबल में रहती है। इसमें Users एकाउंट डेटा, डेटांफाइल नेम्स, सिग्मेंट नेम्स, एक्सटेन्टस लोकेशन्स (स्थिति), टेबल डिस्क्रीप्शन (जानकारी) प्रिविलेजेज इत्यादि। जब इसमें से किसी भी प्रकार की जानकारी डेटाबेस द्वारा माँगी जाती है तब इसे डेटा डिक्शनरी को पढ़कर डेटा को SGA को दिया जाता है, जो कि इसे डिक्शनरी केश में रखता है | यह एक से शेयर्ड SQL पूल का भाग होता है तथा इसका आकार INLORA फाइल के पैरामीटर SHAKED-POOL ZE के द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है।


(4) Shared SQL Pool (शेयरर्ड SQL पूल)- 

डेटाबेस के ऊपर प्रत्येक SQL कथन के द्वारा होने वाले ऑपरेशन्स व पार्ट ट्री की जानकारी इस शेयड़ इस शेयर्ड SQL पूल में होती है। जब कभी भी कोई ऐसा SQL कथन आता है जो कि पहले भी क्रियान्वित Execute किया गया है तब इसकी पार्स सूचना इसके पास पहले से होने के कारण SQL पूल उसे आसानी से क्रियान्वित कर देता है। 


(5) Context Areas (कान्टेक्स्ट एरिया) - 

ऑरकल का शेयर्ड SQL एरिया पब्लिक या प्राइवेट दोनों में कोई भी हो सकता है। प्रत्येक SQL कथन के लिए यूजर एक प्राइवेट SQL एरिया (कानटेक्स्ट एरिया) लगता है और वह एरिया तब तक जरूरी है, जब तक कि उससे संबंधित करसर क्लोज (बंद) नहीं हो जाता है। 

(6) Programme Global Area (PGA) (प्रोग्राम ग्लोबल एरिया) - 

PGA वह एरिया होता है जो कि यूजर के द्वारा उपयोग किया जाता है। जब ऑरकल मल्टिब्रेडेड सरवर का उपयोग किया जाता है तब PGA का कुछ भाग SGA में संग्रह होता है। जब कोई ऐसी प्रक्रिया होती है जो कि बहुत से यूजर में बाटी जाती है तब उसको PGA की जगह SGA में लिखा जाता है। 


(B) Process Structure (प्रोसेस स्ट्रक्चर)- 

डेटाबेस के भौतिक स्ट्रक्चर व मेमोरी स्ट्रक्चर के बीच रिलेशनशिप बनाना तथा उसे नियंत्रित करने का कार्य प्रोसेस स्ट्रक्चर करता है। ये डेटाबेस की स्वयं की बैकग्राउंड प्रोसेस होती है जिनकी संख्या डेटाबेस के Configuration (कानफिगरेशन) पर निर्भर करती है। इन प्रोसेसेस् को डेटाबेस स्वयं ही नियंत्रित करता है। साथ ही कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव कार्य की जरूरी भी होती है।


कुछ मुख्य बैकग्रांउड प्रोसेस इस प्रकार है -

(1) सिस्टम मॉनीटर (SMON) - 

जब भी डेटाबेस शुरू होता है तो SMON बैकग्राउंड प्रोसेस लॉग फाइल का उपयोग करके इन्स्टान्स की रिकवरी (वापस लाना) करता है। साथ ही यह डेटाबेस को क्लीन (स्वच्छ) करता है व ऐसे ट्रांजेक्शन ऑब्जेक्टस जो कि सिस्टम के उपयोग में अब नहीं आ रहा है उसे हटाता है।


(2) प्रोसेस मॉनीटर (PMOM)-PMON) - 

सभी असफल प्रोसेस को हटाता है व उन सभी प्रोसेस में प्रयुक्तरिसोर्सेज को भी मुक्तकरता है। इसका प्रभाव तब देखा जा सकता है जब प्रोसेस का लॉक कल हो जाता है। इसके द्वारा ही किसी प्रोसेस का लॉक खत्म करके उसे किसी दूसरे यूजर को उपलब्ध कराने का कार्य किया जाता है। SMON की तरह PMON भी थोड़े-थोड़े समय पर एक्टिव होकर अपना कार्य करता है। 


(3) डेटाबेस राइटर (DBWR) - 

DBWR डेटा बफर केश व डायरेक्टरी केश के अवयवों को नियंत्रित करता है। यह डेटा फाइल से डेटा ब्लॉक को पढ़ता ही यह डेटा फाइल्स में परिवर्तित ब्लॉक को लिखने का भी कार्य करता है।


(4) लॉग राइटर (LGWR) - 

LGWR रीडो लॉग बफर से ऑन लाइन रीडो लॉग फाइल में कन्टेन्टस को लिखने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। रीडो लॉग बफर में हमेशा डेटाबेस का तैयार है तथा उसे SGA में संग्रह करता है। साथ प्रारूप ही होता है। अतः DBWR प्रोसेस कुछ समय रुककर ही परिवर्तित ब्लॉक को डेटा ब्लॉक बफर से डेटा फाइल में लिखता है। LGWR एकमात्र ऐसा प्रोसेस होती है जो कि ऑन लाइन रीडो लॉग फाइल में लिखने व रीडो लॉग बफर से डेटा को पढ़ने का कार्य सामान्य डेटाबेस ऑपरेशन्स के समय करता है।


(5) चेक प्वाइंट ( CKPT) - 

चेक प्वाइंट किसी इन्सटान्स की रिकवरी का समय कम करता है। चेक प्वाइंट के द्वारा DBWR अंतिम चेक प्वाइंट तक के सभी परिवर्तित डेटा ब्लॉक्स की डेटा फाइल्स में लिखता है तथा डेटा फाइल हेडर व रिकार्ड फाइल को परिवर्तित करता है। चेक प्वाइंट के रिकार्ड के आधार पर वे स्वतः आते हैं जब ऑन रीडो लॉग फाइल भर जाती है। चेक प्वाइंट को और अधिक सेट करने के लिए INIT.ORA में LOG CHECK POINT INTERVAL पैरामीटर को सेट करते हैं।


(6) Archiver आरचीवर (ARCH) - 

LGWR ऑन लाईन रीडों लॉग फाइल्स में साइक्लिक तरीके से लिखता है। पहली फाइल में लिखने के पश्चात् दूसरी फाइल में फिर इसके भरने के बाद तीसरी फाइल में अंतिम ऑन लाईन रीडो लॉग फाइल में लिखने के पश्चात् पुनः पहली फाइल पर आ सकता है। 


किन्तु जब ऑरकेल ARCHIVELOG मूड में कार्य करता है तब डेटाबेस प्रत्येक रीडो लॉग फाइल में लिखने से पूर्व उसकी एक डुप्लीकेट कॉपी बना लेता है। सामान्यतः ये आरचीव रीडो लॉग फाइल डिस्क पर लिखी जाती है तथा आरचिव फंक्शन प्रोसेस के द्वारा होता है।


(7) रिकवर (RECO) - 

ऑरकल डिस्ट्रीब्यूटेड डेटाबेस में फेल्यूअरस को दूर करने के लिए होते हैं। यह प्रोसेस ऐसे डेटाबेस को एक्सेस करता है जो कि संदेहास्पद ट्रांजेक्शन कर रहे हों फिर उन्हें पूर्ण करता है। यह प्रोसेस सिर्फ तभी बनता है जबकि ऑरकेल डिस्ट्रिब्यूटेड ऑप्शन का उपयोग कर रहा हो व INIT.ORA फाइल में DISTRIBUTED TRANSACTION पैरामीटर का मान शून्य से अधिक हो।


(8) लॉक ( Lekn ) - 

जब ऑरिकल पेरेलल सर्वर ऑप्शन का उपयोग किया जा रहा हो इंटर इन्सटान्स लॉकिंग के लिए बहुत से LCK प्रोसेस जिनके नाम LCKO व LCK9 होते हैं का उपयोग करते हैं उसकी INIT.ORA फाइल GC LCK PROCS पैरामीटर के द्वारा सेट कर सकते हैं।


(9) डिस्पेचर (Dnnn) - 

डिस्पेचर प्रोसेसर S2 *Net V2 मल्टीग्रेडेड सरवर (MTS) ऑर्किटेक्चर का भाग है। मल्टीपल कनेक्शन के हैंडल करने के लिए उपयोग में आने वाले रिसोर्सेज को कम करते हैं। ऐसे प्रत्येक प्रोटोकॉल जो कि डेटाबेस सरवर के द्वारा सपोर्ट किया जाता है के लिए एक डिस्पेचर प्रोसेस कम-से-कम बनती है।


( 10 ) सर्वर ( Snnn ) - 

यह प्रोसेस ऐसे डेटाबेस द्वारा बनायी जाती है जो कि डैडिकेट सरवर से कनेक्शन करता है। ये प्रि SQL * Net. V2 के विशेष कनेक्शन है।


3. ऐसे अवयव जो कि डेटाबेस से बाह्य संबंध रखते हैं -

डेटाबेस की डेटाफाइल्स डेटा के संग्रहण के लिए भौतिक माध्यम उपलब्ध करती है। अतः ये इन्टरनल स्ट्रक्चर (जब ये सीधे टेबलस्पेस से जुड़ा हो) व एक्सटरनल स्ट्रक्चर (जब ये भौतिक फाइल्स हो! होते हैं। कुछ ऐसी फाइल जो कि डेटाबेस से संबंध रखती है किन्तु डेटाफाइल्स से भी पृथक् होती है वे इस प्रकार हैं- 


(1) रीडो लाग्स, 

(2) कन्ट्रोल फाइल्स


(1) रीडो लाग्स (Redo Logs) - 

ऑरकल डेटाबेस पर होने वाले सभी ट्रॉजेक्शन के लिए लॉग मेन्टेन करता है। ये सभी ट्रान्जेक्शन्स जिस फाइल में रिकार्ड किये जाते हैं उसे रीडो लॉग फाइल कहते हैं। इन लागस् का उपयोग डेटाबेस के नुकसान की अवस्था सभी डेटाबेस ट्रॉजेक्शन को उनके क्रम से वापस लाने में करते हैं। ये रीडो सूचनाएँ डेटाबेस से बाहर डेटाफाइल में संग्रह की जाती हैं। रीडो लॉक फाइल्स ऑरेकल को यह भी बताती है कि डेटा डिस्क में किस तरीके से लिखा जायेगा। जब डेटाबेस पर कोई ट्रॉजेक्शन होता है तब वह रीडो लॉग बफर में आता है जबकि जो डेटा ब्लॉक इस ट्रॉजेक्शन से प्रभावित होते हैं उन्हें तुरन्त डिस्क पर नहीं लिखा जाता है बल्कि उनको बैच (समूह) के रूप में लिखकर प्रक्रिया को optimize (ऑप्टीमाईज) करते हैं। प्रत्येक ऑरेकल डेटाबेस के पास दो या अधिक रीडो लागस होते हैं। ऑरिकल आन लाईन रीडो लॉग फाइल्स को साइक्लिक तरीके से लिखता है जिसे पहले समझाया है।


(2) कन्ट्रोल फाइल्स (Control Files ) - 

एक डेटाबेस का संपूर्ण भौतिक आर्किट्रेक्चर उसकी स्वयं की कन्ट्रोल फाइलों के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इन फाइलों में डेटाबेस की समस्त फाइलों की कन्ट्रोल सूचनाओं को रिकार्ड किया जाता है। इनका उपयोग आंतरिक स्थायित्व व गाईड रिकवरी ऑपरेशन्स के लिए भी उपयोग की जाती है।


अतः कंट्रोल फाइल्स डेटाबेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है जिसकी बहुत सी कॉपियाँ ऑन लाइन होती हैं। इनको एक अलग डिस्क पर संग्रह किया जाता है जिससे पोटेन्शियल डेमेज (जो कि डिस्क खराब होने से होता है) की प्रॉब्लम को दूर करते हैं।


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