E - commerce in Hindi - ई - कॉमर्स क्या है।

E - commerce in Hindi - ई - कॉमर्स क्या है।

ई - कॉमर्स इन हिंदी -

E-commerce का विकास 1970 में Business community के द्वारा बड़े transaction को Electronically करने के लिए किया गया था।


E-commerce आज प्रत्येक Business org. की आवश्यकता है ? E-commerce में Future business की संभावनाएँ दिखाई पड़ती हैं। E com. एक ऐसा tool है जिसका उपयोग लोग business को modernic, global तथा ज्यादा profitable बनाने में कर रहे हैं। 


E-com. को निम्न प्रकार परिभाषित किया जा सकता है -

Communication Perspective - Electronic-commerce information, Products/services और or Payments का Telephone line और Computer network के द्वारा भुगतान है। 


Business Process Perspective - E-commerce business transaction और workflow का automation application program है।


Service Perspective - E-commerce एक ऐसा tool है जो किसी firm, customer एवं Management को अतिरिक्त सेवा लागत से बचाने के साथ-साथ माल की गुणवत्ता तथा त्वरित सेवा प्रदान करती है। 


E-com. का अर्थ है. electronically business (commerce) करना अर्थात् electronic media जैसे की internet, television इत्यादि के माध्यम से business करना ही e-com. कहलाता है। परन्तु E-comm. के सभी aspect को देखें तो e-com. न केवल business करता है बल्कि यह business के क्षेत्र में एक क्रान्ति है। E-com. का सीधा सम्बन्ध वस्तुओं के खरीदने या बेचने से है ये वस्तुएँ कुछ भी हो सकती हैं जैसे कि information, products, services, etc. जिसका माध्यम होता है electronic network. 


E-com. को business reengineering tool की तरह भी देखा जा सकता है जिसके द्वारा समय की बचत, (overall cost) total cost में कमी, production में गति तथा reliability इत्यादि कई फायदे हैं। साथ ही Ecom. आपके market area को global बनाता है अर्थात् आपका product, service, information किसी विशेष area तक सीमित न होकर पूरे विश्व के लिए उपलब्ध होता है।


E-com. का एक अन्य महत्वपूर्ण aspect यह भी है कि इसके द्वारा business partner information तथा resources का भी अदान-प्रदान करते हैं। E-com. न केवल income को बढ़ाता है बल्कि income के sources को भी बढ़ावा देता है; जैसे कि com. marketing तथा customer services जिसके द्वारा आपके business को गति मिलती है तथा आपके income में वृद्धि होती है।


Advantages of e-commerce

  • ई-कॉमर्स इक्वालायजर के रूप में कार्य करता है (E-commerce serves as an equalizer) - यह शुरुआती दौर के छोटे तथा मध्यम आकार के व्यापारियों को वैश्विक बाजार में पहुँचाने में मदद करता है।
  • ई-कॉमर्स मास कस्टमाइजेशन को सम्भव करता है (E-commerce makes mass customization possible)- इस क्षेत्र में ई-कॉमर्स एप्लिकेशन्स में आसानी से प्रयोग किये जाने वाले ordering system शामिल होते हैं, जिसकी सहायता से ग्राहक अपनी इच्छा के अनुसार उत्पादों (products) या (service) का चयन  order दे सकते हैं।
  • ई-कॉमर्स नेटवर्क उत्पादन की अनुमति देता है (E-commerce allows network production) - कम्पनी की production process को उन सभी contractors को भेज देना जो भौगोलिक रूप से तो बिखरे हैं परन्तु कम्प्युटर नेटवर्क के माध्यम से आपस में जुड़े हैं। नेटवर्क उत्पादन के कारण लागत कमी के साथ ही यह अधिक रणनीतिक टारगेट मार्केटिंग provide करता है। इसके साथ ही इससे अतिरिक्त उत्पादों, सेवाओं तथा वैसी प्रणालियों को बेचने में मददगार होती है।
  • ई-कॉमर्स उपभोक्ता के लिए सहायक है (E-commerce is helpful to consumer) - Consumer business (C2B) transaction में ग्राहकों या उपभोक्ताओं का ज्यादा महत्व होता है। वे अपनी आवश्यकताओं एवं रुचि के अनुसार product बनवा सकते हैं तथा सेवाओं की डिलीवरी कैसे हो यह भी सुनिश्चित हो सकता है। E-commerce में production process fast और open होता है जिस पर ग्राहकों का तुल बहुत अधिक नियंत्रण होता है।
  • Lower Cost - E-commerce के क्षेत्रं में lower cost एक effective लाभ है क्योंकि e-commerce में हम मार्केटिंग और विज्ञापन के व्यय को कम कर सकते हैं एवं अनावश्यक फोन कॉल्स और पत्र व्यवहार ई को भी कम किया जा सकता है जिससे कि business में अनावश्यक व्यय को कम कर सकते हैं। E-commerce inventory, workers, क्रय लागत order processing cost आदि को भी कम करती है।
  • Better Customer Service - जल्दी ग्राहक सेवा का मतलब E-commerce में बेहतर और उ ऑनलाइन customers को अपनी कम्पनी के फोन करने के बजाय, web merchant अपने निजी खाते में ऑनलाइन प्रत्यक्ष ग्राहकों को देता है। इससे पैसे और समय की बचत होती है एवं overnight package delivery जहाँ customer अपने product के delivery status online देख सकता है।
  • Team Work - E-mail ऐसे लोगों के बीच information का exchange और किसी problem का solution के लिए example है। यह organization के sellers, business partners, supplier और customer के बीच intraction बढ़ाने का easy way है।
  • ई-कॉमर्स में हम अपने उत्पाद कैटेलॉग में नए उत्पादों को जोड़ सकते हैं और उनकी कीमतों में वांछित परिवर्तन, बिना किसी अतिरिक्त व्यय और समय व्यर्थ किए कर सकते हैं, जबकि पारम्परिक कैटलॉग में यह कार्य करना अत्यन्त खर्चीला है। 
  • Security - सुरक्षा online business के लिए बहुत बड़ी समस्या है। customer को अपना कोई भी transaction पूरा करने से पहले उन system के integrity एवं saftey के नजर से confident होना चाहिए। 
  • System Scalability - E-commerce business websites af faf customers के साथ intractive interfere develop करता है।
  • Customer Relation Problem - क्योंकि E-commerce में कोई भी transaction प्रत्यक्ष रूप से नहीं होता सभी चीजें online अप्रत्यक्ष रूप से की जाती हैं। अगर किसी product के बारे में Feedback लेना भी हो तो वे चीजें online ही होती हैं। साथ ही साथ इस business में customer न तो business marchant को जानता है न ही business marchant customer को जिससे की उनके बीच कोई emotional relation नहीं बन पाता है, जो कि business के लिए बहुत उपयोगी है।
  • Economic and Social Problem- Electronic commerce के लिए पूरी आबादी कभी भी इस प्रकार की तकनीकी कौशल विकसित नहीं कर पाएगी। न ही सब के पास E-commerce के लिए संसाधन प्राप्त होंगे। इस तरह के व्यापार में चूँकि कम मानव शक्ति की आवश्यकता होती है अत: इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।


भारत और ई-कॉमर्स (India and E-Commerce ) भारत में ई-कॉमर्स अभी शैशवकाल से गुजर रहा है। इसके साथ-साथ भारत के उद्यमियों को इसकी क्षमता और लाभ का ज्ञान हो चुका है और इस ओर उनका रुझान भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का आकलन है कि भारत में computers की कीमतों में कमी, इन्टरेट का बढ़ता उपयोग एवं इन्टरनेट सेवा प्रदातों (ISPs) की संख्या वृद्धि, ई-कामर्स की सकारात्मक प्रगति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


विभिन्न शहरों में नित्य खुलते साइबर कैफे, जो कम कीमत में इन्टरनेट पर विचरने अर्थात् इन्टरनेट सर्फिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, ई-कामर्स की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम् भूमिका निर्वाह करेंगे। भारत सरकार की एक घोषणा के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी इन्टरनेट से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रयास -कॉमर्स के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी कदम होगा।


भारत में ई-कॉमर्स से सम्बन्धित वेब साइट्स के सामने अभी अनेक समस्याएँ आ रही हैं जैसेक्रेट कार्ड धारकों कम संख्या में होना, विभिन्न क्रेडिट कार्ड एजेन्सीज के असमान भुगतान आदिनका सब कठिनाइयों के होते हुए भी भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय इन्टरनेट स्पेस प्रदाता बाहू (Yahoo), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), आई. बी. एम. (IBM) और भारत के इन्टरनेट स्पेस प्रदाताओं को भी ई-कॉमर्स बाजार को लेकर अनेक आशाएँ हैं।


भारत की प्रथम ई-कॉमर्स साइट Redigt .com के प्रमुख श्री अजीत बालकृष्णन वर्तमान ई-कॉमर्स की तुलना सन् 1980 के पी. सी. काल से करते हुए कहते हैं कि उस समय किसी कम्पनी को पर्सनल कम्प्यूटर खरोदने से पहले उसकी कीमत / लाभ आदि का गुणा-भाग लगाना पड़ता था, किन्तु आज इसे खरीदना किसी भी कम्पनी के लिए सामान्य कार्य ही नहीं अपितु अनिवार्यता भी हो गया है। उनके अनुसार आने वाले वर्षों में भारत में -कॉमर्स का प्रचार-प्रसार अवश्य बढ़ेगा।


भारतीय ग्राहक की एक प्रवृत्ति इसके उत्थान में एक रोड़ा हो सकती है, यह यह कि भारतीय ग्राहक किसी भी वस्तु को खरीदने से पहले स्वयं ही उसकी जांच-परख करना चाहता है। बिना देखे किसी वस्तु को खरीदने में उसे यह भय सताता है कि कहीं विक्रेता द्वारा वस्तु के लिए किए गए दावे मिथ्या तो नहीं हैं। भारतीय बाजार में ई-कॉमर्स के पैर जमाने के लिए प्रयासरत् विभिन्न कम्पनीज़ को भी अपने उत्पाद के लिए किए गए दावे सत्य सिद्ध करने होंगे और बिक्री के बाद उत्पाद से आने वाली कठिनाइयों के लिए ग्राहक को बिक्री उपरान्त सेवाएँ ( After Sale Services) भी उपलब्ध करानी होंगी। दरअसल पश्चिमी देशों के समान भारतीय उपभोक्ता इतना सजग नहीं है कि उत्पाद के लिए किए गए दावों में कोई कमी पाने पर वह अदालत तक जा सके, और फिर भारत की न्याय प्रणाली भी एक लम्बे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें फंसने से कोई भी सामान्य व्यक्ति कतराता है और उस कमी वाली वस्तु के साथ ही समझौता कर लेता है, परन्तु अगली बार वह वस्तु की खरीदारी का तरीका अथवा कम्पनी अवश्य बदल लेता है।


विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में भारत की सम्पूर्ण व्यापारिक दुनिया, साइबर स्पेस पर नजर आएगी। यह भावी क्रान्ति है और इसके प्रारम्भिक रुझानों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह क्रान्ति शीघ्र ही देश भर में छा जाने वाली है। भारत में एक बड़ा मध्यम वर्गीय उपभोक्ता जागृत है, जो ई-कॉमर्स में बढ़-चढ़कर रुचि दिखा रहा है। भारतीय उद्यमियों के साथ-साथ उपभोक्ता भी तेजी से परिपक्व हो रहे हैं और ई-कॉमर्स में उनकी रुचि में तेजी से विस्तार हो रहा है।


भारत में ई-कॉमर्स के उज्जवल भविष्य की कामना की जा रही है। विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि भारत में ई-कॉमर्स की शुरुआत भले ही देर से हुई हो, परन्तु शीघ्र ही भारत भी अन्य विकसित देशों की बराबरी ई-कॉमर्स में कर लेगा। भारत में ई-कॉमर्स का मुख्य चालक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) ई-कॉमर्स होगा और बिजनेस-टू-कन्ज्यूमर (B2C) भी भारत में ई-कॉमर्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा। हालांकि इसमें वैधानिक और इसके परिणाम भी अत्यन्त उत्साहवर्धक प्राप्त हो रहे हैं। सॉफ्टवेयर उद्योग के मुख्य संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्वेयर एण्ड सर्विसेज कम्पनी के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय देवांग मेहता का कहना था कि ई-कॉमर्स संसाधनों को समूचे विश्व में जबरदस्त लोकप्रियता प्राप्त है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय सॉफ्वेयर इंजीनियर्स की बुद्धि और कार्यकुशलता को समूचे विश्व ने माना और सराहा है।





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